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मनमाने नोटिसों पर बैंक खाते अटैच करने के आरोप, व्यापारियों में आक्रोश

कोरबा (न्यूज वाला)। जिले में स्टेट जीएसटी विभाग के सर्किल-2 द्वारा बड़ी संख्या में व्यापारियों के बैंक खाते अटैच किए जाने की कार्रवाई से व्यापारी वर्ग में भारी चिंता और असंतोष का माहौल बन गया है। व्यापारियों का कहना है कि कई मामलों में बिना समुचित जांच और विधिक प्रक्रिया का पूरा पालन किए जल्दबाजी में बैंक खाते होल्ड कर दिए गए हैं, जिससे व्यापारिक गतिविधियां गंभीर रूप से प्रभावित हो रही हैं।व्यापारियों के अनुसार सर्किल-2 के अधिकारी अनिमोह सिंह बासवार की कार्रवाई के कारण जिले के अनेक व्यापारियों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। कई ऐसे प्रकरण सामने आए हैं जिनमें बैंक खाते उन मामलों में भी अटैच कर दिए गए हैं जो पहले से अपील में लंबित हैं या जिनमें राहत मिलने की संभावना है। वहीं कई मामले ऐसे भी बताए जा रहे हैं जो नोटिस की जानकारी न मिलने के कारण एकपक्षीय (Ex-parte) हो गए, जबकि जीएसटी अपीलीय ट्रिब्यूनल अभी पूरी तरह प्रारंभ भी नहीं हुआ है।व्यापारियों का आरोप है कि कुछ मामलों में केवल एक-दो माह की रिटर्न फाइल नहीं होने पर ही लाखों रुपये की डिमांड और पेनाल्टी दर्ज कर सीधे बैंक खाते अटैच कर दिए गए। कई व्यापारियों के चेक डिशॉनर हो रहे हैं और कई को तो बाद में पता चल रहा है कि उनका बैंक खाता विभाग द्वारा होल्ड कर दिया गया है।व्यापारियों के अनुसार कई नोटिसों में लगभग एक जैसे आंकड़े दर्ज कर बैंक को खाते होल्ड करने के निर्देश भेजे गए। उदाहरण के तौर पर करीब ₹4,00,520 जैसी राशि विभिन्न प्रकरणों में दर्शाकर बैंक को भेजे जाने की जानकारी सामने आई है। व्यापारियों का कहना है कि जब प्रत्येक व्यापारी की कर देनदारी अलग-अलग होती है तो इस प्रकार समान राशि दर्शाकर खातों को अटैच करना कई सवाल खड़े करता है। कई मामलों में वास्तविक देनदारी मात्र ₹2,000 या ₹3,000 जैसी छोटी राशि भी हो सकती है, लेकिन इसके बावजूद सीधे बैंक खाते अटैच कर दिए गए।व्यापारियों का अनुमान है कि केवल सर्किल-2 क्षेत्र में ही इस प्रकार की कार्रवाई से लगभग 30 से 40 करोड़ रुपये तक की राशि विभिन्न खातों में होल्ड हो चुकी है, जिससे बाजार में नकदी का प्रवाह प्रभावित हो रहा है। गैस एजेंसियां, किराना व्यापारी, छोटे दुकानदार और ठेकेदार इस कार्रवाई से सबसे अधिक प्रभावित बताए जा रहे हैं।व्यापारियों का कहना है कि केंद्रीय जीएसटी (Central GST) में इस प्रकार की कार्रवाई अत्यंत सावधानी और विधिक प्रक्रिया के तहत की जाती है तथा बिना उचित प्रक्रिया के किसी व्यापारी का बैंक खाता अटैच नहीं किया जाता। राज्य जीएसटी में भी उच्च अधिकारियों द्वारा सिस्टम आधारित कार्रवाई के निर्देश दिए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर कुछ मामलों में इन निर्देशों का पालन नहीं होने की शिकायत सामने आ रही है।व्यापारियों ने शासन और विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से अनुरोध किया है कि यदि कोई व्यापारी छोटी राशि जमा करने के लिए तैयार है तो उसका बैंक खाता तत्काल रिलीज किया जाए, ताकि वह अपना व्यवसाय सुचारू रूप से चला सके। व्यापारियों का कहना है कि वर्तमान में जो भारी डिमांड निकाली गई है वह कई मामलों में उनकी वास्तविक देनदारी नहीं है। उदाहरण के तौर पर जो व्यापारी सालाना 30–40 लाख रुपये का कारोबार करता है, उसके ऊपर भी 10–12 लाख रुपये तक की टैक्स और पेनाल्टी की डिमांड दर्ज कर दी गई है, जो वास्तविक स्थिति से मेल नहीं खाती।व्यापारियों का यह भी सुझाव है कि ऐसे प्रकरणों में सरकार द्वारा प्रथम अपील का एक और अवसर दिया जाए। यदि व्यापारियों को पुनः प्रथम अपील का मौका मिल जाता है तो अधिकांश प्रकरणों में वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो जाएगी और अनावश्यक डिमांड स्वतः समाप्त हो सकती है। छोटे व्यापारी महंगे और जटिल जीएसटी ट्रिब्यूनल की प्रक्रिया तक पहुंच पाने में सक्षम नहीं होते, इसलिए प्रारंभिक स्तर पर ही राहत मिलना आवश्यक है।व्यापारियों ने शासन से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष समीक्षा कराई जाए और उचित दिशा-निर्देश जारी किए जाएं, ताकि व्यापारियों को राहत मिल सके और बाजार की सामान्य गतिविधियां प्रभावित न हों।